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व्योननंटनल्व नाय राक्र 8 व्योखवनौल्न नायं राकन्न- ज्योषत्रन कमटनस्‌

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षवि व्पान्नष्ट्वि वन्रटम वब्नटनं खाट्म यान्र, ८ज्रथांन्र दशट्न (कच्छं बन्न नट ८्कङर्‌ नानाम) -अट्डन्न जांत्रट्र कबट्गद्ख1 (सन ध्यै्मोन्र खल,

(के खट्व ८कछे टन (<ङ्टम कटन्र ८वभेङ्रून व्डांगज्ा ए" ऊौट्न तााङेञ्र1 अड (व -ष्व््र- कि (यन कां, कि (यन ङ्न 8, कि (यन (न्त्र व्खांयन्र। एंडे व्र _ नटत्र (येग ब्रटखन्र नात्र, नरख्न मोनिक काट कि्चिट्ष खुल नौतन कांटगटन्र ८ऊांयन्र। मांनिट्ङ ना+-निकछ-सूचत्र (छामाट्कद्र (खन सूरत टय मकम शन्न

कटे एच्ट्न यां कनंकथ्यौश्रटन्र, ब्रांखोन्र कटन शगार ङाटम ङ) नित्रा चूनाोन्र यानन अटन।

राज्ञ मोटय दबट्त्र खोक कटन्न ख्पटमां (ज्यात (ट्त, छन्न टन्‌ वैदी खनट्नच्र शन्न खर्नेन्‌ शटनत्र)

(के कथ] नौवांटनन्न मटन, (८गाननश्न्रै- नांन्‌। चद्रटनैत्र गङ्टत्र गङ्टत्र ङ्ाभिटष्ट चूतचि। अजिगङ्टनन्र खखान। ङाट्बटम वाननाखातौ,

वक्रना ॐोङांच्र नवांटम नोंसाटम्‌ किच कणि ; -नोवाटम्‌ नोंखांट्ने कान (नच्ड ङे निष्ट यनि, ख्प{ननाँन् जघ्न ज्रट्डन्न छेनेटत्र जंटटच्र छांनि

जट्खन्र कूर्यात्र ८षटट्त्र याकि प्ाँत्रा नूट्वैत्र नटन,

“व कट त्र व्‌ (ङा गाटकब्र वूकिनां बांटन।

(डां गाटफव्र वटक त. याट ? सआंटत्रां कि कींव्रा--- (्डांगाटफन्न ब्रट्व्र मांब्रट्र छर्माव्व छारा !

ख्पाटना वश्‌] खाटन्र। ङांमि ब्रटश्रटष्ट वांकि-- खोट्ख। (तथ। जत्र) (तव्रनि--षाट्फट्व्र गहेट्व कि ?.

८जंमन्रा र"डांङे छवि टक] वजि" खरे ष्टवि, कश] नाहि ब्रट्डं ज्र. गद्य नन्व कवि। खं वांव्र (कटमत्ड तमि खां गात्र, खवाक गानि, (डा बाटतत्र (मड कथ्‌।-नौङे-(कन (कमन खनि (म (यन्‌ (कम्म ब्रट्ड ्ाज् बरट्ड न्रवान्र (त्रथा- ठोनिन्न। छोनिन्र। गट्नन्न कथि गटनट (नथ) ! (्डांगाट्कव (क्ष्म खानि कयन (सुथाटन मद्व, तरट्खनच्र वौट्य क्ाटन्र श्रजिन्र) च्रन्न नोौत्रटद।

(मरे (फट्ल खांकिं गाञंहेत्रा रिद खांभांत्र नन इष्ट 4 उव्‌ र्नं यट्नत्र नखोंत्र मान

सोम, (तों विन्तशरुन्र, ( ख्पांनैनाट्प्व (खटङ्क कविफ्श्रुज खमे:

क्वि खमौम छे्ौन छत्र श्रोशांनौ* नसौ कंथांत्र यो$ यका कत्रि अछि खन्न तिंएनन्र गट्था मोर्जा-णश्रेप्ठ विट्ण॑स अरिष्टां गां कव्रिग्राट्टन चे "थन वहे विट कब्रश्न| कविं छत्र ग्रा क। जटग-८छंव। शूरदटकतर श्नौ- (नौकरी वर्गना क्रिग्रायन कवित्र वधान कादाशोन। (थ्भनब्र कदा ररत वा॑नूकट्त्र (काथ इृडेट्ड अक थेभिक-(भिकोटक खाँनिग्र। कवि (थटभब्र (्दमांखि जोदेग्रौट्टन। जउांशत्र कङ्‌ कृषांगै-कृषावी, कथन क्रगक्थोज्र नांशेन्र-नागभेगरी | कवि कथन नतौन् भूवं शिग्र, कथन शूक्रद्वन्र मूषे तिथ (थटमन्र॒ नान टेवण्द्यित्र वर्भन] कञ्रिप्रादष्टन ! टेदकव कविट्तव्र॒ मऊ कविर वृन्तांवन ॐंत्र व्वानूए्र खत यूनो श्वानौ" रेशोत्र योत्र मवशछनि कविांदे 62119४6 ४०] 4 छत्रा निजाकाव्र षठ़ेनीट्कं कवि थीत्रे टांुहि्रा घान नोरे। बि “दे कविजांश्नि ८अद्मव्र कदि बृ ग्नौ देशोतब्र एश्तर्ा०पपत्‌ इदेव कविन्र मखं रनाद्र देवगिद्डब्र शृ्रिषम्र पिट्रटष्टं «नि कवि टेन शेराटफत्र॒नैद्रन्नेटब्त्र मदुषा यके! मोग खाट (थेद्मवर यथम (मौनान रृरैट्ड यात्र कन्रि्र जांशौत्र (नव शृ्रिगखिदड कवि हे कादा माध] कव्रिगराव्न। चदे वदेजब्र वालूषब्र नाम कब्रटभेव्र कण| मार्थ्कड)। वाटे वानूषएव्र निखा छोटक, निखा श्द्; वू एश (मभाघ्न जत्र कृषिन्र दीद, शूष एटत्रबर वटक बाटनन्र छांमनग याएन विष्टोदेट्म (तप्र, नौव (टेथब्र जपम टन जद मनृख शमि टूनिग्रां छे खांवांत्र कथटन। रटवेन्र नौरुशोनि नत्र (सांट्छव्र खांवाप्ड छास्त्रं नट (थट्मत्र खंश्रड७ मनि खासिपरि। घाप शिव्रन (्वक्नांत्र चात्र गाद्रय खावांत्र नन कजब्र (म खशेख भेषिब्र। (जटम शदानषटटत्रह्* वृटक गनि खाक्रौ-चैखौवर वाथा -शोनि खट्ट

कवि खौगाट्क छत्र देवर ङ्मिक। निशिट्ड परित्रोहन (मखं ऊघ्क चांया्र

सपांरद्विक धकद्‌प्‌। सौव्‌ नत्रोम (गांशांग्जक वं नूत्र बरनत

-शेज्रम कानने एिवभिन्नौ जेय ननलांन दद अदे शरृखटकव्र यष्टतने यादि किप्रोष्छन। द।व्‌ मथनौकाख पाम्‌, अटनौकहख पएष्ठोगाधाोंगर, निरिप्नन ब्राद, ` कांखौ नक्रग देमूगांम, यओावून कटनम्‌, जांक.ग मणिम्‌, सोक्‌.ग कौोरत्तर माखन @₹्‌, तिनश्रकुड (वास्‌, (मश्न नांल अ्कीनीषात्रि ववर यात्रा (कषः (कङ्‌ वहे शक | अकां कव्रि्ड खांगांटक नानांखोघ्व मांशंषा कनिश्रप्टन ढेड। ट|] हिमां कृतर एड, खव्रमोतरत्र अयम शीौनणित्र सव्र-क्रशं त्ि्राद्न ; ङ्‌ खड] (वोटेत्र दशत (त्रदश्त्र खनमांन कत्विष्ड एहि न।। मिक निन्नौ येखट्रखनांथं कन्र यांयां ब्राथानो शखट्कत्र नत्र न्ट अकिरा पितरापडन। उष्य छारात्र निक थव थदांनौत्र यीक्षोग्गेत ८काताव्रनाय एष्ठो्धास्त्रव्र निके शनो बरहिवांय। व्रांषोनौ" न्लौ कांथोत्र मो$यव्र चटनट्क खांतत्र कत्रिवर्टन, (गरे छट्रमाग्र हे शरक ध्यकानै कब्विलाम

«हे वहेव्र कविङांडनि यींग्र करे टना चषि सार्था पिंक रृषेट्ड 4 दिषट्त्र किष बनिदाँव्र खा््ट। बथेभिमौ खोमल्त्र वमिग्रा नांन। गीँग्रट्क नानीन) सटद्रब्र शरन्‌ शांशत्र| विखिन्र क्रष्िव्र (यीरोत्र मटनाज्रक्जन कन्विश्र] थाटक। उांशट्ड “थे खदूविष। शत्र ८व्‌ (कान नीग्रकडे (यीँडत्र गटन (कान शत्रौ जट्वन्र खवर) ब्रम॑। कन्निव्ड गैट््रन्‌|। सक रटद्ब्र शंन (यजत्र जघ्न छांग लोभिन,डषन खक ररटव्व्र खक्रभौन इटेटग खटनक मग्र व्रमज्कं श्म्र। वदे खंक दाछेगट्द्र शोंटनब्र द्द८्क यि (कान भेग्रक ांघ्दद्र मात्य छंद भिन्न) शनन शोरहि्ड शाघ्त्र उद्व. (म सामल्त्र छांडटक शौन नीँरश््डि (डगर) श्प्रना।

देर] मटन कत्र्रा यदे शुखएक खांमि युशामरव के सट्त्रद्र थद कषे डाघ्वव्र कविांशंम «कड अथि कद्विब्राशि। खांयांत्र छेदक कज मकन बटे रवै शोरेकवृनं खङ्रगांन कत्िट्वन

खे कविजां्नि वह्‌ दएुश्ये दट्वव्र गाथी दइटेत्र। याघाव्र गोत्र यवक णिगि। यांखं खडि मट्छाचन्र मात्य दे शोटत्र वांङत्र कविनाम भटनन्र खांटगक- उद्गी श्रोप्ड छोमोदेत्र पिनोम। (कान जजर्र चांएेत्र (काट बि कात्र मटन दश| 4 कू७ (तग पिट्ड शट ्टवङे मग यम मार्थेक दृटेव्व्‌। खांमाव्र शूत्र क्न (८क कृषेब्र। गहेद्व खानि नां। खांमांत्र मट्नत्र ५रुटक्‌ मू.थद्वत्र मोटय श्ब्रड जोव्र क्रनिटकब्र श्रिष्ब्र र्देष्व। चजौवटनब्र वनरूत्र भव्य देरंदे कि क्म ख्न। ? ज, ड,

--थरे कविद्र (नयौ वङे--

नङ्क जरि २1 जाथानौ

ब्रद्ौीन वष शने जर्‌

पाम वटयाकश्ौन। 'धकषठांक |

विश्वकवि ज्रदौल्णनांथं ङे कवि जश्चटक्र वटनन -

“जोम छेन्मौटनत्र कुविछांत्र छाव छाया विसद्म-वच्छ मन््गुन्‌ न्म्‌ अत्रटनेत्र ! सथ॑कृर कविर संश्च “ङे (मथटकत् खट्ट खख मर्ट्खं या॑टफंत्र निथवांत्र नैकि (नटे यमनजुत्र शण किनिम छात्रा -नियैटङ नटत्न ना 1”

्व्‌(भद्ली खान (क्ट्ल्लान्‌) 9 रेखामोन् एत (वासिक जनां) 1 वटम्‌ शैष्िदष्ट वद्धे (रेत) <वकचौनि शजि (कटल्लान) कवन ८म खाजिटवं (कटत्नान) कान (म खाजिख्ाशिनि (मनां कटल्लान) १, सयंखिकान | 1. गज्नांखय (ब ब्राख्च्वौन) २० क्‌विन्न जमार्धि (जनं) २२ काटब्र खछ्िगान्‌ ((मार्)न्यमौ) > (जानान ईटनङ्ि ख्याङ (वमौ) एनान ((मांसाच्छौन) 8 ° विणँ (जनं) 89 जूजाखन्र (लवांमौ) 8१

ख्यात कणन ख्यामि€ वक्र (जनीः ९५

वै नद्धो ख्पय्ान शा न्राटत्र जिच्राट्ष्ट च्‌ [व्नूच््‌ छट्क्+

८कमट्न्द नाश्व दन्न्‌ सदना नटन चट

द्कंयन्‌ टन नज्न्नं व्नाज्िज्ना छच्रटमं नशर नखर यमिन, दकल्निट्ख एल्मं छट न्द व।ख्मिन्र। गन्द >*टन्न-- चेन्नै ख्याना रूट निंजाट्षट स1व्नूच्र टट

लकाया (यन्तन माया ख्वाजा ल्क्य लवकर,

मं1ट्वन्न ङ्श्नंत्र जरित्र छङि८ष्ट . -ल्चनु

-छ1 ज्यांत शनौशनख्िन् उरट्क्र (छ्य मर्यानिि कांट्नं यट वटक, मनँ टक श्निगश्नित्च पफूठि टच वैण कटन्र--- चै1†ग्नक्वा ख्पागोंच् रूट निच्र॑टष नतव्नुच्च छट |

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छे़ानौनत्र एव्र शनांद्र भूमन यकन लुङि

खटननन छेन॑ट्र छांमिदटष्ट वन वानूच श्रुतौ

दद वटम नोषौ वटक रेट याश शिथिन (नखानि छटेग्ा कौस; किटमन्न अग्राय वांजांटमन नस भनोनक भैीणिः ; मङ्‌। कनोटन वानुना नींट्रन ८वछाय आणिः

(२) छेन्न णएटत्न कृषा ग-वशूत् चटएत्र चन, कांडे मौन रेट भाषएम माथ नेन्न

दनुर

ख।७.न उतरिस। नार्थव्र नजर नच्छरौ (म (यन्‌ एनिदटष्टे (कानाग्र ; कांश्टनतर ङ€श्रं कना नाखोग्र, नाण सूतिः “छ्छानैरष्द वूटकव चन कुयांग-रूतौ

(७)

“छेानौद्र एव्र' रेट (यटर एम राश्यरोत्‌ होन ;

एौिशोटतर जन कटब टन कि बग्र। खौटन।

रां श्टनब्र (व्राज रेएदेग्र। शूनि

तूट्कंत्र वमन्‌ निट्ड एौ ग्र शूनि,

गेपं शति कन कनन ङूनि, गू भ्रव नात्ड;

"उेोनौदर एवर' एककं कंटवर कदलूब रटत

(8)

'छेएानोण्टव' ए।र्-नोऽया (त्रौ

| मद्वत्‌ (दना--

वान्‌ नटग्र जोत भंदाभौवि कव्व छमाग्र (यन्‌ |

छेखानोत एच

कु्बगौ कि दभि मं ट्ब (वनाय भिरि णन ददु (गट्वव्र कृलाम, कोटशेत्र मन कृषा छद यांग सट्क र्शर ; कष्ट धोदम छात्र काकि कटत् गोट नट्‌

(८) "छेएोनौव एटतव' टन खशवटत्‌ तरौटखत् तरौगो, अशाट्वरत्र ८एे (वादे याग्र कि भाग ठौनि।

विद्वकौ कृषां१ वांकाडेगरो वभे कुनट बट्यं कोन-दाथात्ाभि ; (थट्क (चटक एत्र भिश्बिग्र छेदये, दांनूक रेट ; छेांनौव्र एत्र वाशेग्र धात्र वनेत शट्‌

(म वटम्‌ नैष्ट वषे

खटेग। (म श॑र्ट्डदष्ट वडे- 4 बटब्रह खात्र (कश (कांशी नारे षू रे खांमि वषे (त्रट्‌ एक्दतरो जामिर नत्छुटष् जांशात् बूट्य ; त्रा) मूट्थं शाभि, जत्र ८४७ (नट ए्रनिटज्टष् जोत्रो सूट्थ निक (म्‌ शट, शनिक खांवाव्र एश (मात्र बरूर नटन, खमि कविजाम्र वृध] मोन नीवि वदद छत्र मटन जाश एनौ, द्रि कोटनो (षट, ८यन णि कांटन। खनि, (निषा एनय एनस मनिटषट ग्रूटथत॒ कमन-कनि छाद्‌ छोनांथौनि (भौन नादस नानी, दिकनौन्र नङ टम्‌, वुद्धि क्रनेकांन विन्नांम माभिट्े अमोत (मटशतव्र (मटन दषे (म नैष्ट, कि वटे कानिटन, (क काँटम कि यट (नव, खमि (मथिट्डषि यैटन श॑टन छात्र ब्रूत्थट्ड शौजिद्न (व्री जात व्रा] भ्रूय शानि एनि टजटष, (म ङमित्र मत्रा वतर, रे टन द) ब्रा बा! (छन कृष्टण नौनांख्ट्त् (मड त्रा! (टन सब्र दमि, खथद। एटेणि कूल, रटे भान (कष्ठे (दटश्च तिटम् (यट भिद्शमिरशि क्रि ङन्‌ नाःत्त्र न्‌, 8 ब्रूथ यर रानि दटत्‌, ख्पाव्र यछ क्राशं दन्न ङ्ग छार भम्र नटय दरणि (न योव छटवर छात्र व्रा मूय--जद्र बरा राभि, (म वटम्‌ नेषद्‌ वशे टवरट अजं ख्पाव्र (कङ्‌ नडे हे शक खामि वदे

शक््ांनि शोभि

भन छत्र खातर काकं छलि, प्वर्थाटन ॐर्थीटन रिति, यटङ्क (सट कटकं मटथा कृररेटरुषश्िनि शिबि (गट खाक कशु] वलिव कथन वटव नटन नटन, मां मिनमोन अह चढ़ (रवैट खंछिना कृषिन। (वाटब्र (फटभेद्‌ मद रेटके। वांखांत्र, रौटहे शाटक कांड (णंन, ८कुछे शनिदव न्‌], (कषे खांजिटव नां वाशेद्‌ उांटर्‌ (नान ` काटन कांटन कथ] वलिटव खथ॑नि ख्भमनि मजकटनं ख्ामिं

टन ऊत हि क)-षिश्रनौ वनोरेट्व व्रांनिं रभि ८ज।टत् यां दन, कोटना खट्कने रेदव खनिवाटतर गि एशि ऊार्‌। व्टन (कंय (मरि (कलन नां शटन नीटत्र

खजनै< रुर्वा कटब (कनन अल्लिनोदथन् बि,

(नानेन कथांस्र छां निट नदे नौखिब्र कडि

छतु थद्वि बाट्ड (कटने (म रीन खांमाटत्र (पशि, (रनानोटनन्न एषि ज्रां] (गले कथन राजि (नवि <वकथानो ङजि+-- (सन ख्य काट्त्र धक्ान। (गष (ष्टटस्, "गुरतं हटकत्र (काष्टां त्र कन गेरुष्टिनि (वटश्च (वदथ

यन वयंङाटखन्र (नांनांनौ खाटनांक वौर्िद्च नाथन नेग यक कुक नीवी रेट्‌ एटनशिन्‌ य्यांकाटभैन्र किन्नर

चांनूपएव्र

यन नज दश्‌ लप्रौने खौमोटय नीटमव्र वाटठेव कंटन, ककन वांखाटश्च कलम (र्नाटभ्र नत्र नद्य्‌ (श्न टन

छिटक छारा द्‌ कोक शिन. (माज शिन वारा, मदश्नि त्र लंछाङेश्र निन कणि शोभित नड ;-- (मरे नज टत कृन्‌ कृटकङ्िनि, जाट्ड द्टम मधूकन्न, कथम कथाँग्र (का ज्ट्डिश्िनि (वना खोख-व्‌

थांनि राजि (णटथशटिद्र डांच,८यन दङ्िन नटत,

शूद्र (मनं २"ट्ड अछि (एन) (कषे षणि निरिग्रोट (मट्‌ <कथानि राजि ! खांकांगे शडेटड कणि नौयौत्‌ नान, एश्रूटवव्र (व्राटफं नांडन एविदड करान एोकौत्न कोने कयानि ङ्ामि | नेशकिनीकंटन (वन्‌ (वदनां ब॒ (न, नयौन्कटत्रल वटर नट (कोशाम्र कटतटष्टे (गन

(न खांकोटभेत्न वटक (छ्टम याञ्र अक्क कशोन चूण - छाति 'नेटत्र यन वच्छ तायिश्ा ८क)थ्‌] यौदा याश छे कथंन) ङांमि ! नदर्‌ कथ], नदर्‌ विगर, व्थिग्रङम, गे वन्नङ यपि (लट यैनि, नदर छात्र (टम क्म

७८यन कर्थत्र नोज्टन विन्त ! रोटखटखत्र वुम्‌तूलि,

--ऽद्वि बट्द वमि नोयाद्र मांयाम्र जत्रा ख्ट़ा-कन्र बूनि सयकथोनि शानि ! वका तौ (वटय्र अटमदष जेटमत्र एोन्‌, (यन खातर गागर (नथ त्रटिग्राट्‌ ८ख्द्छब्र रूवृमान

क्ल मं खांमिटरव्‌

कांनटक (म नकि खोजिटव (मटणत्र €नौटव्रत्र वांनुषटटत,

< नोट्वत्न (छे न्त ना जिदष्ट वूखि रषे मटन कट्वर चुदिि छांरे टम क्ट,

वान वाोंछांम के नांणानि कटत्र वामुत्र ओषएन शटन्र

कान (म खाजिट्व्‌, ग्रूद्थनि छात न्न एटदत्र अ,

छ्य ख्यात्र एयौ न्तम खोनांस्र जष्टदस्र भिटसरटष्ट क़

एटलत्र दौ शौटमत् (क्कट्ड गण्डे डोरं ने),

८कथ्‌] व] शनम, खांव ष्ट} ङ्नूष, (कंथा व्‌ रनु ना

कान (म खामिट्व ङभिश् रोमियो भूय चानि छक्जि, धनोटव खांभात्र नड त्‌ कुषटिटन् खमि किव) खाखं कति कान (म खांजिद्व, खड वानृुषटत, नाटतर खां मांत्र धनर,

जात नटव्र नपौ--वाटणेत छर कट्न नमौणिन्र "नत्र

कांन (म ांजिदटव, (नांशत्र रि णनि, एनिटष्ट नासत नान, कोटन्न ङा, काट (यन जोभि (णवि नादे कुड कान 8 शगाटत्रट् एत्र यनू नटस्र (य॑टन, ठेस वानूत्र रथ,

--8 चाटन ८म कान एटि ब्रा नोटत्र ांर्द्र। यिदव नथ ।'

वाोनूषएव्र 9०

कान (म यांजिद्द वानूष्टक्र, यामि कि यावत्र रंगर, खांममांन-जाव्रा गैौयानि यां रेषंडेव मोत्रा नीम 1 तरांभम्छे नष्श एनां नैष्वि खांवांव्र शट्ड, (थाोब्र काद किरक-कनि, कोङन (षएाटव॑त्र नीटड ; भनार कि जा नेतरि देष्द श्रवादेव माना, कानां शाटन्फ वशि कि (वग कशौटन्‌ मिं एव्र-ष्वन)। ?

` कौम (म याजि, भिष्टोटे शि छि थीशाट्त्रत्र काटन। (कम, ांछ्टकब वाख शं टन वुदि रत्रन्‌ छेवांत्र (ममं

8 वानुष्टटतर आंजिटव (म कोन, जत्र मूट्शं छदि, सगृ छेवात्र (माना द़-कमन खांजिघ्व (मांङटन श्वि

८य खाजिदटव कान, गेनागर नैति कुर्‌म कृटनव रौत्र, एयनि नूश्रूत् मय इदेव एतन कछ्ोद्ग्र जत्र

आर्थ वर्विटव एशौनौद नड] कछ मौना काट१,

(वभूत खर्धव ूमिग्चा एभिर भ्रूशेत्र कद्वट नटन

कान (म खौजिट्व वोटे-मदिषां र्नूौ (काद गोष्ठ, मषठेत्र (वाटनटव्र माथ कटत॒ (यन शूटन (ट्य नारि नांणि

कोल (म मिद वामूषटव्र, शाटव्र छौत ङे नप, जोति कुटन (मात्र ङ) कट घन्न वङ्‌ कूट्त नस यरि व्‌ कि जोत ममग्र र्द्व (र्थांग्र एत्र थति,

(मात्र घन मिद्य यादव शोग्र मनभिमार्गिटक्ट्ड छवि ८्म कि खष्टे एद #ंोट्स् (मरिव वद्वा व्र क्र थनि, गदर गमौ कांटव्र वरिष खौखन्रग भत ूनि र्ग्र (शिषटव, ङ्ग (मथिटव ना, कोन (म खांमिदटव णट्वर, लनीघ्त्‌ खामात्‌ छां] चनदौनि, खमि शारि (महे बटर

कंन (ज खांभिण्िनि

कान (म खामिव्राङिनि €नगट्दत॒ नुषटटत्‌,

रथानि नय -(र्दैटके वद्मङिनि कि खानि कि अटम कण्टत्र | कट्वर नीौखत् अष (नटनटष्ट छाश (कामन न, छष्नि त्रा! नाटभ्न जालौर (नटनटष्ट किन नटथन्र धां जाना 718 (व्टस लाभ दतिट्ज्टष्ट, खांनटम खवुन्भं छक्र, ख्यागांन्र एषाट्वर शरान खांमिग्न!,- (पशसा खवांक र्‌'ढृ

तिना जाटव्- यात नानि यक खाग-भैश्‌ (एट्र शकि, डे वांनूषटत्र मांश कुट कुट कुकाव्िद्च याट छाकिः (कयना जोटब्-- यौत नोति डे छेकांम्‌ दाे-त् दन्‌, वननम्‌ वन्रष (गात्‌ नन थलि कलिस्रटष्ट न्मन

(मसिनांभ जट, वू (कन रद्र वनिट्छ नातङ्‌ खाकिः कान्‌ अनैतटश खांमांत्र ननांट्हे किटन सड वाथा आकिः ! --वनिट्ड नांत्रिद््‌, टन नज्नवामौ, (पथिटऊ टन्‌ कि ऊट, खन (व्वटनष्ट यदे चन वटन (मकि श्रू ङ'न छोङे | टन कि (मथिव्छ-पूत्र ङ'ट्ड यादत्‌ (ङ्टनशिटिन विस्‌-व्‌{न, (म वन्‌-विष् त्री (वैद ख्य॑टष्टे किव। जौवटमब्र अवमन्‌ !

वानृषएत्र 9२

वनि नांद्क- निषेव नैशिक, (कन टन मिष्घौमिष्टि, खलम एतम्‌, खदभे (पशत, मत्र) भास लोभ, शि-रि ! यानि ने टै॑तम्रां वटम्‌ कड कष्टे म्ि- छांति काट (मात्र एटथतर कांडिनौ (कमन कल्विश्र। करिः |

नग्रदनत्र कन ब्रूम (रनिङ्‌, ब्रूटथ बौ विनोमर रोमि,

करङिनांम, तूकि शृटवन्न कय मं }टदट्र छेमिन खा॑मिं !

शीण्टन्‌ जंर्‌टवर दांडांम कतिर, एतन ए" योनि शृटम

मौशांव्र (कट्गेट्ड बर्न पिटग्र वमिनाम कौट बर्गर |

करङिनाग,- छोना याभात्त, खाकिकांत्र पिनि चनि

सनि क्रि व्राथी ययन किष रोट्ड यरि षानि! वित एनाँ वथु,

खांकिंकात्र र्ट ङूनिटछ नीट न। खख नटवत्‌

(कोणिम छट मिव ब्रयि, खाजिकाद्र मिन रोग,

व्मनि कत्रि] (कोत्र गांटव छट कि तथं नो सौम!

“टे मिमकोदतव माशोत्र (कटमेदछ (रवद त्राय योन्र नाकि [--

भिष्टोमिष्टि कड वकिग्र। (नेनाम छाङे-नौन दकि शकिः

श्छटम (ग (कवन रमि-ग्रूटथं जोत खत्रड गो थाडेन ङौ,

(मे ब्रांड गूटय- (व बूथ खांमि क्टत छानदांमि

शरूटवट्ड गोयिन शमि, (मान) (रवानि नां तिदस (गेन वुकि शोऽग्र। ङून-वांमौ |

कान्‌ वटमरश्िनि वदे दानूषटटत्र योव (मत्‌ वृद चट्द्र- जत्र नौटमे एटन (षट ठे नरि एररेथानि डव श्टवर\

कौन (न खानिप्रोिनि

(महे रशे डोघ्वर तरवि-भट्छटर तिने (नद रब -- नांडे विग्र छंखाकंछि कटत्र कुटनत्र एन श्रि

जाति वक छौटत वक) गेगथानि, पौन वानूत्र (नथी,

(महे नैथ रिट वटमशिनि कान अीकिम्। भीट्यतर (वथ कोन यटमर्िनि, एश। खात एयो « €गटत्र जपित क्रिः

गोय। (नटन, जदि ८४8 नाति! नपौ खेटठषिनि निः --छांतरि ८छे वदि (छदम वटम्टिनि खां जांत्र गोजी वटब्- वह्छमिन. शटव्र (भटश्ररिङ्र जात शष क)निकाव्र रटत

कौलिकौव्र पिन्‌, (भक्र-कुटर्नितर॒ खन अशिग्राट्व्

खेषु क्थन्‌ खाटनांक-कम्रन शुटरेङिनि वटव अर)-नानटवत पिनङ-८ज।। (कन-नर्‌ त्रत 'भैटत्‌ स्तौन-उव्नी (खटम टमि वृकि -वाथीौव्र दद्र | कानटकं रटत (नैयिङ्र खांभि, रोग, शग, कं कान, याटव्र छादि वदे गरटना दानद ्िग्र पिष्टि ष्वोन ; (मरे जोटवर रबर, (मयम नागिन शूलिभ्र। (मंथंट्ड साभि से जोदटनत यर र॑ राकाव च्शिव्रोट्ड् मिन-याभौः- (यवां श्ट मि ष्वलिष्र! मटद््टि, (म-कावमोरन खानि

(कान्‌ वाटम्‌ आमि नाकौ र्दव्र (महे कूट्नत्र उक्रटड रानि ! षू कटिनांग--गत्रा-वक्ू, एमि टन (मात्र चतर

खमि खानिटम कि कट्तु (य खाक (जो माट्त्र एव्र कट्‌ ! वूटक (व (छांमाटवर त्रयिव, वङ्कू, वूटकट् भान्‌ ख्वटन ;

नगटन च्रौरिव ! रास (व्र खांशे), जामिम याडेवि खन्‌ ! क्नाटन चरौखिद्‌ ] < शत्रा नौदय खरबर कनान्‌ (नी ;

मटन (य बौयिद्‌, (खछ (शद (म ८व कष्‌ नाट नटन (काण!

वांलुएत्र | ` 98

८म (कवन षु कान्‌ छान कणटब्र एरिनि खौभानब्र शाटन ; 8 (यन खादन्न (कट्मैव्र मादव, (याटदा न) रेरा मोटन मांगटन व्माटश्र (कयिनांम छाटत्र, (मशिनाम (मरे बूथ !-- छोरिनाम हे शूटमक्र षेद कि कट्वर ८य जाटम एष | (मयिटड (मविटड मकान कएल, एश्रूटवरत्र एं (दन), शैज्छ्िमि (कटने नेखाटश् नैङनि (भट्वट्ड अकिस्य ८यना। | दोनूषएद्र ङट्ड विणोौग्र मधन नर्न दटक्च्र मोक्रि

नोयांय् शीयांग्र खोकोटगेव्र वुट्क (गेकानोव्र कन नां

(मात्र कर्नि-- “मिन णएटन (नैन, खौमि ज्व यार जामि--” -- यात्र व्रा) मूष कूटनव्र बन, जोट माय भिं राभि-

` (म्‌ (मोटवर किनि, कषठ कशाय रोशन खनन (मोत, रन छोंशात्र (मोगोत्र एरर, डोञ्नि मक्न (मोत | ८म (गोट्व्र करिन्‌, “(गान उशैगिनौ,खो छट कन ज्ट्व्‌ विकांग्र र्टैक््‌, खायां खमिव (गोत्र शूजौ ङट्व खट्व ।” रोजिग्राडे जोटव्र करिनांम, “जयो, विश्च नमच्छंत्र [* खाशिनौ जामि कर्िट्ड नांतिङ् नयन-कटनमन्न थातव्र शनिकं याष किद्विषरा एौङिनि, कङ्नि वामौ, “नात्र | (कान किट कष्ट वाथ! (मरि (जाम, (कन (ट्वं उव वांब्वि £ च्पांमि कर्निांम, “सन्नतर जय, खोमा नय्रन-शोत्र- गौयां (य (नै नैशेन (जोगौटव्र-व। डे (वमनात्र }

“यामि कि निटत्र-८म (मोटत्र वान, जामि कटिनामः-^न्र ; कूनव्रऽ जंघांङ नोटच्र लोटत याद, (क जाट निषेव कम्र

` भेनाब्र योश मानां (के नो कः टग्रड गोनात्र टत उांरोव्र (कोमनं कुटनत॒ खटक्रं (कोन वाथ) गिंट्ड नोट्द्‌ |

>€

कल्‌ (मन यामिक

षे याट रुदश् 8 (पश्-उक्रव्र यङ कृरूम यङि गेट याम शुष्य | ८म (मोद निटग्टष्ट धे खानः 4-कथ छांविव खट्व

(नंङ-८कग्रम (ङः४ नट यन्‌ यर्म भाशांम्र ट्व

^जट्व (कन्‌ कम ? शय छांगमिनौ, जौवटनव (छातव्रानि !”

काद्‌ (रन (नैटमर खोक्टक टनष्टे मद्रटनेद्‌ (कट्‌ लिनि' |”

खांभि करिनम ^(मागांत्र वक्तु, 4-(गात ननात-(नयथी,

(करे नौव्रिट्व न। बरष्टोदैग्रा पिल्ड रेङौव॒ नौव (वरथो मथार भैमताथानि

मांशाग्र नरेश एनिटछ ङृटेटव रबरूटथै एत्न छे नि'

4-ङ्ीवटन (कणठे (भगत टव न, निव नां कविना छार,

दे वक छबि छलमाटग्र्ि यङ छौल विदयत्र मोशे

जत्‌ दनि मयी (कन कणि जामि, (छो मोटव (मिना (मावर (कन्‌ वष्ट याय गौषटनत् शांतो छाश नश्रन (पान्‌ खयि कि मव), मि (कन ८र्श्‌। बाङ्रव रेव थटन- वििव्र शेख वदे नोऽयं यां, मोङरटवटत्त नारि (मटन खौ कांग शैत्टषट शग चन नोन, ट्त नवनो (मट्व- मक्ता] मकान यैख्मिन शां मव नव क्न (भट्य;

यख मरूट्त बटे उर तूटव्र नी, (के नारि कट्वर माना (के नारि नीट कांिव्र। नरेद्ड मोशाव्र यांकांगै वानो -- विशां भट्ट सन्तत शत्रा, कानटन कूख्‌म-कनि,

(कोटन (कोटन जब्र नाकौ भाद्र भान्‌, श्दत्र मधू यनि

वाजम एटनटक कून कृेग्र। नांयाग्र कोस्र घांन- यात शोग्र खोट दिल्नादेम्र वाम्र फून-मयिटत्र मौन

-वालूऽव 9

ढिन णटनट् नारशि- छार जटन खाल मम-ब्थिकात्र, काटत्र। (कान द्‌ नाडि खथ मा्रदसट्व शाब नो बांद्रष, नारि कांट्तरा खर्थिकात्‌, भाग्रस जवाटत्र गाडेन व-ख्टव, गामव श्न काव

८कन मि मधै। यांद्व रृदेटन, खजैक्‌ (फर उतर !

रिश्च < कन-निगामांटव्र (कन त्राय शद्वि |

खमि कपि मथ्‌। (कन मि नारि खांकोट्मैत्र क््टन-

(यथन (योग (जो गात्र (नेग, (फशिजांम नानां टन खां काटैत टन्‌ चव

यावर वैौबिब्रद् जटपत्र र| मनि विश्रुनजत्र

मि (कन मथा कानन ङ्"ट्न कृटननब्र (माशन गत्रि-

वदटौन (छामा (फर्‌-नौगैयानि श्रूनटक छेरिड छविं !

वारेन वााटम छोमिग्र (यजाम (जौमौद्‌ कुटनन्न दटन,

खन ङस भिषटस्न मिय खन नौ।ऽब्‌। मटन

(कन मि मथ! भोनूष ठङेटन मौगाट्वर वत्र कजि- खमौम शाद्व मौमोत्र (वात्र दाङ्टित्र (तटशथैष्ट शतिः भि (क्न मथ मन ङ्टल न।--खछ नूटत्‌ याडेडाम ! खाकाट्थे पट एरि' (जांमाट्व्रडे नाेरम | खमि खन खमि (व खमौम, खन (मात्र कषा - दिश्रून -(क्ट्म छभिट्ष्ट मि कपटे मौत सूद). | राय॒ व्व मनुष राग्र (कमन कनि नव जाटत्त, योटत शत्रा-८द्धोौग्रं नारि यांस

-9

कन (मं खु भिश्गिगं

सामि काफि (कन सन्नत म्‌] (छतरोटद्र दलिद चुनि १!-

< (वतनांब्र, (कन भि वटम्‌ मारव शेव्रो ङ्नि' !-

८य मङरव दे शतावर (परिष नौखित एनम] नति

यत वाठ! गाय छदे लम (म (य नीनांग्र €लन कवि

खगे लण्िष्र। नीखिवाटष्टे यात्रा बङ्रमःङिड वटे-

खमि करि मथ, जांत्र किष न€ भि (म आंङ्गूष वह लऊनेट्छन्‌ मक्ता खद्रि-

(छाय (रवृ यद्‌ शतावर (पदिन जरम नाम कासि `

याशि्टित शामि८ष नोखिव्र कश्र९ जर त्र जाांटन वनि,

कट ठेउवांश छेनक्र नत नविगोमटगत्र बमि।

८म्‌ वदन्‌ (व खांमि.न। खन मन्तं यांनि नदु-नांतर्रग भरगैक्िद्रत नीर्शिमां (तुद्टष््‌ मः त-वक्रन

खानि कपि मथ्‌, खार्मात्र बार्याट्त्‌ खांटम (म सांब खांभि, गात सूट्‌-ष्रटयं अन्क-ङाटर्नाव ूनान-कुर्नाट्म नाभिः,

-कनेदड (क्षे एोङिनिम। जोटत्र ; ल-तर्बात्र नमतोशमि

वाव पिघ्ड याहे, (महे किटव (ङ्लाग्र न्न पिनि | खशरेटरत रोटठ जडे-

धम (मात्र जागाद कटिश्च (काकाटन विकास वाड

कटे रजि एोग्र (करे ऊाटनादाम।, (के एस भिटठे-कश, (कष्टे निटड एत्र मग्र्नद जन, (कटे एम थव वाश्‌ा। गेट्खछत्‌ (क्रट्ड वटकन कृवा१ कौल एरदेग्र। याडे- काव नगं (को शुना एनन्‌, (कान किष मदन नाहे खमि कं[रि मथ, र।े-८वषं (महे 4 सामल नद्य वाट उानवामि--ठंर्‌ावशुजाग (कम८न खोनिद्‌ द्ट्य | र्र्‌ शाय मय, छनि (कन्‌ ङ्न रटत (माकोननोद्-- २७ कुदवघ् एष यादव ङ्म धर्नषएह्ना जब्र

वनुष्व +

मव कथ (मंत्र श्ट (म (कवन कर्न वके रौमि-- “(मात्र यञ कथ कव वक्मिन, खांकटकब जामि !” शट्स्र शट नटय यमत्र (नेन, मिदमेटव बिद्‌ ष्टम; मक्ता[-िमिट्द कनम्‌ एवांःन मं टङडन्र बर्धोन (भटश्

गत एटत्रब्र माजन वाजम ब्राटङत कुट्ङ्नि-८कमी नोिद्च नाम्न इग्रव्रांन ङ"टग्र कितिन छेन्न (मन

मिन (भेन, कुड बाख धन), चत्र वमन नवि

ए्टन कांन-नक्नी वव्र वद्र वद्रहबब्र नैथ्‌ श्निः

खलं वटम्‌ खारि हे वानृषटत्र, शाख वादव क~ कोन.८म खांजिनं 4 दानूष्ट्द्र, खांत्र (म खांजिघ्व नाकि

छिन

खागौन्न 4 चत्र रखोरिस्ाटष् यव खाोभमि वौवि छात यतु, नेन कच्िट कफस (वाड ८य (बाट कटतदटष्टे गवव (रगाटत्र कजिन नंट्थन्र विवानी ;- शेटय्‌ नेट्यं स्यामि किलि जाद् नानि); नौचन तखनौ जान जटद खानि घूब ८व ङ्टचटष (यातः; स्यानात्र 4 चन्न र}्िन्राटष्ट (सव) खनि वौ्ि छात्र चब्।

खमन 4 कुन छोशिन्नाटष्ट (यव) खमि छात्र कुन वर्धि, ८य (नट्ट वूटकटङ खोला कानिग्र। खाब्र नोनि खांमि रकभ॑पि ८म (नाट पिदटश्रटष्ट वटव छवा द्ग, खानि (डे जाटत्र वुक्च) नन ; कै{ऱ। (नदख्र ऊाटत्र ङ्न कति मान मांद्ाणि जनन त्र, ख्यानेन कर््निट्ड कनिना टवष्छौटे (व (गोटत्र कंटत्दष्ट शंत

८मोच् बूटक (यव कद्र (र्वंटशट्ष्टे खानि खन्न वुक्‌ छनः, बीन कुटनन्न (मो रनै-क्रा शुनो नक चनि गूट्थं (न कटर न्ख वोन, खयि नटख्र जि, खचि ग्रूययानि, डे ङ्टड कर किटय खानि, माखोटे नित्त खांशनन क्ट रकाभिद्च) (वाषे ८व (नाट कटबटष्टं नच्च:

नज्राकंब

खाट सौनिनि खांभि <धभनि कुतिय। कपिश्च कौषटिघ्व जगो्ञ फिदिमर्यमौ शून टगर मौन नौविवाटब्र शून-नेत्र एटि नांरे- पूग (व्वटनरिद् शक % किटि, ख्चिट्द (कन नीं ?

(कन्‌ छलंक्र-व्दान एनम्‌ वटन' कर्नाटन (नरि कर्नन्‌ ङ्ङेन कान | ८कन वावि मौनि उष नेक, शंय निगौगि नो, (छव ङक्श॑न्‌ खंटनटङ खांकिट (कं (शट अनन नारथ |

क{{ त॒ नटय एनस (कटणि कनष्े। नटन नोर नास, कलत शटशटड एनिटरड याज्ट्क खोंड गर्न मीश नर्‌ {ख (रटरर्टि, कानन ८क्टरशि, वाटकगटत नटि भित, खनत वाटड खा जकिटकं मङंनौ डो द्राङ्न न्रौगेष्टद्द खाकामं शरेट्ड छो तदव खानिय्र) नटति डतरो मान, गूर्ण हदव कनौ नाडि कृषन्र कटबरष्टि याना

२9

भन्रख्र

मूत चरनटश छांगदेग्र मित्रा नतर खाटनांक-खौ,

क्छ रा-भटथं शं ्ातागोटमत नटग्रशि वग कव्व

(वुौटरब्राड दाप्टनत्र मीटथ (गवटड वाक्य (एन, विकषनौदर नर॑ खां काग कौशि (शनि खाटनांव (पौन (महे चाभि यां छव कूनवटन मंनिनांम नैतराजष, मोकट्त चरमं क}खिःत्‌ वर्बिटन हे दिष््रम !.

चकन ०७१) | 4१७ 1

कवित मभार

[ चटनत्र भद्र नपौव् ड्व कित्र कृषि! सकरपिनि गाोलिनौत्र ८गल्य् मलोलछिकोत्र माध्य षडत्र जोव द्ट्स्र (भ्रन। (यंट्मन्र यथम खडिनब्र वश नहे एनुन ध्नैद्स मालिन्तैव्र (मल्श्रतर चात्र करटक छल्‌ गोदत्र केवित्र एुश्थ (मं वृक्टड नांत्वरना। | |

भनिनौत्र (भग्र खांटम नारे कान खां मांडे डतर मा,

टत्र तमिस कविन्न नवाण ङे यौटष्ट शन-ष्ट ए]

एत वानू-णंथ खटवांटव्र चुरभग्र शृनाद्च दमन्‌ शटत्‌,

पेयिटनच्र दाद्रू भेखांनणि याब जोरावर वुट्कत्र नेट

खथ वानूत्‌ बकृट्वर एलिस वृूटकत्र खाश्नतरन्मि,

एश्रूःवरत (तामं भगेन वितिष्र। र्।निटक विके रभि खाट कि छश मग्र र्ट्द ना, खादक वदे नमौ-ङोत्‌, वानूत खांथटत ्टवि अओ†किट्व ना ऊशौत्र एतनि

मुत्र पिनद्धे (मनि दे दां छोटक कवि, यां्र--चांय-

दे नप्तौ नदथ (महे सत्र (यन्‌ वन्‌ रद्य देट्छ यश्र।

क्रिव्र ममर

क्कटम किन यार, मक्षा (कटन त्टङत्र जान दनि

नेण्किमि ऊीटत्र ङंटम येन-देन भिवम (गैट्सन्र शून

नप्तौ-नर (वटश्र नेयिटक्वरं एटन, जांशाटणत गे्वाब्

कविवर नैतन धृलास्‌ मिनि खट्ग (यन यद्र |

चे नैवे प्रिद कड (नाक खोटम्‌, छात्र कि यांनि नदडि- < शदथ कि (क्षे कर नोणि्राटष्ट (न खामिट्व वट्‌ छे ? मूत गर्किटिमि चट रजि पिक्‌-वनत्र मौन),

ग्नौ-वधूत्रा मौने व्वोनाद्र जंशोप्ड कटक खान |

८महे कटन कवि (त्रिन मगरूथ, खौटम मौनिनौव्र (अम, टन! एन ₹'ट्ड भिथिन्‌ कुम शष्ट नथ (वट्स $ री वा ज॑^व्र (रनिदष्ट एनिदष्ट, छेष सनौन मौ, खक्र-खटक्र वांकिट्ष्ट शर्न मांवा (ङ छो" ना गनि कविय (गल-ग॑थ (वटम्‌ टम विकनौत्र नड,

-- कटर कान खंटन विद्र विट (मौनांब्र कमम कश कुवि शध छ)'टत्र एरिर (पथिल, (वन एटि जरि छि, मात्र (पटर र॑" यर क्र वाटे महेन रेका कवि मानिनौव्र (मद्व राजि-मूट्थ जत्र खोव्रड मांथोरेन श॑ंमि- करट्नि, “खंकिटक (पतौ कट्वर फिनित्राकोवर कूमांत्र खामिं। कौनिटक< आभि माकिम्‌ शकिं। आंमिव्‌ (छोब।३ काट्ट- मन ममब तरछोवर कुमा व्र कं मिन (गट नांद

(मकि टट (गोट - पिट्ड ङ्व छोट्तर विनौ-सटछ (र्नट९ माना, बटन नग्रटक। (उबटन) नश्ट्क। ८म्‌ थक्‌ दिषम्र षान्‌) |

वल र.

यामिक छरा नीलन युटनल्, दौनिक वकूल फूनं ;

सत्र बादद मटक (गानानं नीचिद्ठ नाडि शत्र ८यन इन ८म मानांब शूनः निरि रदेटव तख।व्‌ ८्टनत्व नाग--

कि कत्रिव खमि, मोत तङ (कटने छोटे खवू गौयनाम। खख पवटमङिनि मान। नेदट्व--(नेदय॒ (म कि भमौ त्‌! वष्न बन विना-र्रडौ बान। क्‌ ८फटय नटे खात्‌ छार्त्र ननात्‌ नेकमछखि र्त्र खामाट्व्‌ भिदटगटर्े टक (जांमाटत्र (एशाट्ड यंमिनांम जोड़े धरे मं टद चत्‌ ८थटक्‌ 4 यनद आं मातर कित (वटर ङ्टव, जां किक नृठन कट्व-- मात्रो त्रु (कटश तरालव (ष्टन्‌ मोना मिदर ङटव ।" कवि कटश, “खन मांनिनौत्र (अद्रय, खि (यरि भान), कुशाय्र-कथांय रूल शथिग। (जंमांट्त्र नैद्राट्ड वाना !

घ्य कश्‌] खांमातर (ननैन मनव अंशौ शकोत (कटम्‌, रखोव्र वटव चुगाटेश्राशिनि निम्र खनैन-मटन--

खौ खिटक (व-वुक (वप्नाव्र चोद्य (म कशत ष्ट खनि अयि यनन कान रूल बहम (रटथङ्ि मानाशनि।” गालिनौतर (टश रौमि कृङिनि-“ मव ॐनिनोम्‌, खौष्छ] वन्न (छांमात्‌ नलांस लियो कर्नल नाम?

कवि काक “मि, कि लिटथशि खमि (जोम) उल्निव शटल, साकोटमष्रड छाम चाकाशे छात्रा वदाव्र नाद्र कि जनल छवोत्र कितने रखिद्ररद निं निभ) निघो जटे-- अनिनौत्न (ट्म गल नछिक) जीर नाम लियि नादि बालाय खमि लिश (व्रचष्टि (खौर्गाव 8 ताछ गय, पथे थनोत आं ङसव्र बहन्‌ िटड नीटत यङ्‌ एय | `

+ 21

कविम्र मगार्थिं

8 (पर्‌ त्रत दौरिगर एटनष्ट (गोटमेत नौव ख्टन खाट जारां (छे रेट मानां लिट यि टन खांतव्र निधिश दे छ] घटत (जागा कथाद्नि शति, न्ाट्उत्र जात्राटत्र माका मांनिग्रों कानि विांववि;

` खान) अद्रव पूत नैथ (वद्र एटन (गद भरूमासिव,

जत्रा (फट (नट्ट कि (वपन (भंव आकन्‌ नागे ८मङ्े मव खमि मनाय निटि जत्र नियियाशि जोड - खात्रऽ (य्‌ खघ (टन सद्व मि खार्माद्र कौवन गौड ।”

^4 मानाय (गोत्र कि ङ्ङटव काक गालिनौव्र (टम कमर, कवि कट्ङ्‌, “मि, (वमनोव मौन खेट (य खक्स ! ्भिकिरौननाों (खंभांत्र विषां (जाम्ब भीन खट्व डे कथ्‌] वटनम--€ (पटशत क्राटशं छन किमिद इृटव (डांमात्‌ नैनीगर (मौत गलांयानि < (य छव ऊय॒-रौत,

8 क्ट (जोगत कर (गक दष्ट, छाव < (य मयि छात्‌ (मात बोनांयांमि नट्यं शर मथि | बष्‌्कान्‌ नप्ौक्टन-- काटशैव्र तगो कट एेनमन चन र्टन्नाटन्‌

डे छव मि €टे त्रा भ्रू, ८यन (मोट्डन नना, खाऊ याटत्र (ण्यं कोलिटक छोशरटल खयनि (फशिषरड यानां। खमि (यन खों (पयथिटङङ्ि मरि, (डोमोत्र करनैयांनि रष्िनोत्र टरा एटनटष् कृट्न कृट्न दाथ] रौनि

8 उव (मानां काष्ट कृिम्र! नोट काट्रनत्र (एदे, खा जं याटत् (फथि कानिटक जांशटतर (र्न (मिव (के पक खौनि यमि वां थे कष्‌ श्र, 8 खव ससमांयानि वन्रटदत्र (कान टना खोमिद्र। नटय याम्र (कंथा ठनि

-न्‌1 नूषत | | २९

छन मखनौ (मर्‌-वानूषटटव्र भूनिग्र खांव्र मानां (रमय यो छमि शोत्राट्सष्टं नेट्थ--कड (म रौनि ब्ान्‌। | €-(पटङ्त्र मदे छथ (णट्टन 4 (मात्र बानायामि

दिशे किटिनत कर (खोला कथा जांनिटव (ममिन नि उशन यपि वा हे अजगाव नट संग्र ख्व्‌ गटन,

(खनि मखमनौ, चक्‌ (क़ जन कूट नप्रन-(काटने

टे खामी नम्र खाट] (र्व खारि वटक कन्नड शनि ; छांवि-- नटय नट्यं (षे यम नाकि (नाशन (वपनाँ्थानि ।°

मलिनौत्र (मटम्र शवाडेन, “कदि वुकष्ेम। वन्‌ (भीष

धू कि (वपन) तांच आंख (जामत मानांत्र छट १" “सभु (दपन)”--कवि कटर ८कटत्‌, “निष्क (वन मयि, < (नख नग्रटन ख्यात्र रिष्ट नग्र वमनाट्त ओषु नधि ।” “क्न वाथ] शनौ €" गौनिनौव (टम कटर जत्र कष्ट ट्म, कवि कटक “मरि, ननाट्एेव्र (न॑ «७ स॒ (छाम छनटवटम 4 खौवटन याद्तर छानवामि (मंडे मद (टव (फस माते, जारे यांशद्व्र मं निनौम (महे वानेन एङांने |

खद) उतो यात फिनांब वाशि, (न निष्तर (टव जजि-- शत्गोन भो माकाश पिन गू नाट्सत्र आकि 1

“कन, खांमि छव कि कटवि कदि” सूथाग भनोत (टग्‌, कवि कटक, “(क्न छष्ि< र्ङेग्र। टन (भांत (अच (वट टप्टमे (कटय जां ®अति कणियि) (जमाव कंस अति, जौल वाथांत्र यांन व्दोनिष् (मात्र र्‌क्थानि खव्वि।

तिट्ड श्ब्रिड शनाहे्या या, वात्र वौवन शोय्र-

“ड (य भिथिन, रछनवामिवंवर खाट यणि छाना राय!

२१

कदिन्र मपां

यपि कान) वांग्र-योटत्र कोट एंडे (महे ख्टस्र वार पू, ज्टद (क्‌ कषक काट कश] रिटम विर भाँटनव्र रत्र !

(मत्र निथिटन 4 दाशद मथि कृवा नारि रै यात्र छोलवांमि (मदे फिनि (बांट मव (टय (वमना-हे ! खोटे तिदय खांमि अयि गांन, जाति दिशा वि, नेकमणि कात (कोथ नैव जि, खौमि (य (जगांत कवि !“ “र्ग ङ्खांन” मांनिनौव (गष क्ट त्र शो शति, “य्‌ काथीट्त खांभि एनिटन «५ खट्व छाटव्र नाटम किव। कति मांनिनौत (गय, कुन लम (थलि, कुटल-कृटन शौयि रव ; यनन (णदं रभि याष मथ, (वमन नां ८ख जोत ! (मत्र कृन-वटन शूल विष्टाठेब। चुट शूटलव् भोग मक्ता-मकोटन कदन यनद नक्र ङे वांग्र।

गुगःनत मल्क निथिम्‌ौषि मथ (कवलि कटलत्र रौमि,

(मदग यांक्िटक (कमन नद्धेव (छांगात्र वाशौत दनो 4 लौवनशांनि बटणव (भमन (फट्नम उन्न रटत ;

लग््वतर लह्टत (मोग) खगन (छद्म शत्र शटत्र

थति माथ यौत] मटनत दौनाटरड व्िट्ड नौतन) सत्‌, एतानेव चाट जांशाटमत्र (भाव शिकटेस्रा (मे पूत ।”

कवि कटर, “€ट्ने। कृन्‌ कुमारौ, कृन नटय जि शाटका, (म कुन ८य मयि, काट नेट सांग जउाटत्र मि (फं नाटक] युनत रमि (य एरिटन कोम (कषे कन रश्च वामि - टे कश्‌] चति (जगाटत (पटने वलं नांडे (कान वनै ! य्‌ कृन (डांमत। जनटक वशिष्टं (य कृटन शिष्ट रोतु,

(जो माटणव्र (ण्ट (कान नन नांङे (म्‌ णघलव्र (वणनात्र १” “नम्र, नम्र, नय,” मलिनौत्र (टगर कट्‌ श्रूनतराय रजि, ङ्तिनि (मातो दनिडेय) (परे शेटथु कत्रक्नत्रनि

वांलुऽत्र

सगत (कटं खषु रानि मयौ-- वात्र कन्न धौटक, नेघ्थवर शूनां मनिवर जामत नीलम निदब योरे छोटक |”

““उव्‌--छवु--€ट५ (मांनैत वव्रगौ खांगाटत्र कक्रन्‌। कवि नाट बाट्द @षू (ट्य (यद्या (बोदन वाशांव यमिन भस्ि!” “मनेय (कोशाम्र {" मालिनं वय्‌, एनिष्ट छातीत ८वना-- वि गोदा मयु, (मत निटड र्टव ऊौदन-नां (थन !”

कट्त॒ जड्िभंग

कत खछ्र्मान ररत नर्तन ौवटनन् मार्य, कटां वाथ] (कषे छांविश्। (णयिटड मबस्र नांङिक नैस वात्र नदष शाद्‌ कितिनि केगणिशा, (म कं (छोटत्र (कट्य नो एौरिषा ; स्यु मिट गान नीना जयि, वालि वुट्कत्र ष्दाना; 'ख{ननाति श्ोट्ड नीर नतिलि णट्न-नाटशेन्न माना

भटक नन्नां१्‌-नङेग्र रेशा कचिटज्दष्ट (-ष्टनट॑न), छाव द।म्‌]- वजि रेल्‌ दष खा नेन रौ टडव्र (एल्‌ खन्न] क।टन दोड। गूटयत्र मास्या, निधन श्स्म॑ट नीट फन) सख; डांस यख्िगान, किद्‌] खौटम खश, -- (छाति भ॑ "भं 'इट्ण्व कपटे कुन नाजा नेट नट अदृष्ट कड

स्तैवद्नव्र माम टेरमन्र काटष्ट थकप्रे यः र} जि, सकर एर्‌ नि-- जासि दिनिगटम्न नवाम द्यगि तनि वकद ककन], कटे खान्‌, -छन्न। जौटन उत कुरुषे! कणत ; माट्रटसटदर नटय नौघ्ाश्च वपत्र, त्ता डान विनिबटस्र; षिमिभिनि (यना कच्िद्डटष्ट निषि नटन नैत्रान नटय |

वरलूषएव्र

छेशटण्त शो चेरते त्ख), निग्र डाराव्र टे, दिनांगरूटन यां] विका नींत्,-किमिटड क्म] ८नदे सिषे कथटन ककन! कलिश्च, कटवा काट क्िष्टं खून वा| (विभ ; र॑ट्ड नो नहः याश्च ड) छशिग्र, एटशत (खनांत्र अछ, वाशि छाष्‌टव्र यङ्ऱ। (कथौग् खांजमिटन नस्क)

शोटक्टड छेशत्र। (वमौ कन्न (वनागरी नटस्, (व्कजात्र। खामिद्र। कतिम्राटश्ट भा निषकत्र (वंक कट क्ट (म कथ], ““खांमि छनवामि," छोति (टर्‌ (शष्ट कुड लंग छोमि, बरक व्रङ्न ब्रम त्रौभि, नट्ट एत्न जटन ; "छत्रा यो पिटस्ष्ट कशत ना, शव्रिदर्डे (शरद नटन

कालं नारे (छत्र-- कालं नटे ७ट्त्र, रे (फकान वधि, भिदष्ट (कन खातर ङतिव्र ८वांन मा रूटसटत मन जासि समन शीँनेन (क खाद (कौशावर नपौ-८मं मटन भिजोनौ नैीखांग्‌ ?- मरूटसत्र अन छटा (वटने धां; शिष्ट छक नार्‌ (्ीट्म। क्‌ कि (कांथासर निब्रौछि कट्टर माङ बोदर मदन

ख्व्‌ (य छांराट्व्र ङनिटड नीँत्रिटम खंश्च जउ्टव माए नद, ऊति क्‌ गणित गांव नट्‌ नहे (कवांनट्न्र; मात्र (णव नट्व चलोात् नांडे यपि नवर, (ङ्न) नाड जत्र; खमिव नां कष्‌ गादन्र निवात, कौवटनटव्र खकाख्टत्र | मोष मरूव नेषिव्रं छोरौटत शूखिंव मौषित्र घटन :

9

कांवर ङ्गिनः

रसद नेव्ांग-मानिवि भत्रं (काशोग कादि द,

मन मत्रमौ (कोथ) किदव्र नाडे (स्रटर्‌ छत्र यांद्र बुक ; खां कोटे वाजांटम (कन (कोन रष, नेटशृत्र (कामत (कर्‌ किव नाड ; < छांनवांम।. कोट्द्‌ पिट वांशे-कोट्बर गेनाभेनि द्रि, गक वरव थरनि कक भन नटन षदे छवि

(जौगोटत्र ङ्८नरि खलं

(डागांटव्र ङटनशि य।ल-- मो वाणिन दभि (जामाट्त्र छ।विव, खाति न'टणुटष्ट कलं मकान ेरिग्रा ८क्ाटेदड याहे, नणौटिव ऊोटत्र यारे-- (मदेवादन मि निषदे खांमिद्ठ, रशोजि (य वाद्मनो षे! ८गड़े कटव भि ब्रं] न†७ (बटन टमष्टिटन नपौडौटन्न ; (म नौद्रय॒त्र (व्य। कटव श्रूट (नट्ट छत्र] वनुसात्र नौट्त ; (जथो (ख थन चन कमेव, छनि खाविश्राष्टं वु, (मरे कागेद्न एराट्ड जतताट्बर ख्व्‌ नाः त॒ (य शु सि दाना श्य, खोभि (मथा (त्रां यमनि (्दछाट्ड चाभि, कोट्ग्ैन्‌ नोजांय निमित जान, उाट्ड (चामं सास्र खामि। यथम्‌ त्रदिन्र जिंषूत्िसा (त्राण, (डामात् दीन (टह, कणिन खांमि (कटय छनि राख क्रंड। कामि (दृह छदे द्ट्न्‌ खमि (ौगाटत्र विटन, क्टमैत्र॒ ८कऋट्छत्न नटवु कषटो-नीक। शंन खटकाट्त चुगांग्र (कवि शनन क^ट्त्

माक्नौ खा खनन्‌ (पटयैष्‌, कार नांर्‌ नङ (गल्ल वटक ङाटमव्र नोटखब निनित (खण््ाय (शट्‌ (लि्‌

(जांभाघ्त्र इटनशि जंक

(छमाति भौटस्रव्र व्रथानि (यन्‌ (महे शानटकटृड भंर

जारे वृद खांमि (मेथोटन याहे मनि रमरि बाज] ` (मरेयांटन वि एशानि लजोग कनमौब्र कन ववि स्राटका मटन यट, कट्व रिट्यष्टिष्र (जोर्मात्र भेनाौस्र मासि |

खाल बटन याट्ट- (महे कटव मि अशत्रौ-शान नि,

कांटन शेषवब्रशटिटिन ङ्द (रवँदशष्टिटन्‌ ए-4कषटि छात्र ङ्नि ! सखोटक। कि यांत श्वर त्रम वटमष्टिङ्क्‌ (महे कट्द्‌, “अन टदाट्ड (य (एयिटद (छाम), कृषाटन॑व जामी क्टद्‌ ।'

ङ्न -ङल मि, 8 मव छावांव्र खवमत्र नारि खाक,

गोदिटन सथन ममन कांणिट्ड कथ्‌] न॑म यौङ्‌-जांद्,

विकांटन (क्वन्‌ (वराेट्ड याोशे-नमौत्र ऊौट्वर्े यशे, ८माटनटर वूकि मि ्ो। खांतब्र (कश कङ्‌ खांटम नांटे ? महे नैश रिट कर (नाक एटन - (मरे एल-गेश्‌ श्त,

एटन भर कांन पिन-नखनौत्‌ खाट्ला-ष्ट नाशा ट्ब

एटटन्‌ नवि, एटन एत षटटन गड ॐर्‌ छान्‌, (-व्रथ-८नयङौन खनाभिक गथ रेया खांनैनङौत्र पिन-दनांकांत वलश्र चितिसो निर््म नैणु-नांन,

घुमाद्रद्ट आंटी गतिन न) काट नोंटदत्र माश !

(महे नेश पिदर मि वटमरिटिन्‌, रूल्‌ व्रथदौनि छेाप्यर यदिटड छांविग्रा्ट (जथ (न्ट कनटव्रथ ठनि !' ऊ। विराट, उव {ओटप्रब्र भक एेटरुषिन दाढा ; मव्ेक्‌ जावर द्रविदांश यामि दुक्त अाणटटन शबर |

व्‌ नुत ¢:

- खाक] ८म्‌ शक इष्षिष] ट्र मं टरत्र खेखन्‌ वांव्र धये वागुषटव्र <टकन। खामांत्र ममम काषठिमरां याब! भिषा मजनौ-- मिथो) 4 मव्‌, निङ्टवरे नमर भति निटटवषे (मात्र मांमनांन मोग भैटव्रटवर कथन्‌ श्यति?

फू नेष्क्िम्‌ भेनेटनत्र (काटन नानोन (मत्र (मलं

छांद्वि "नृवर वम्‌ मानान्‌ वद्र (वोटणद् रौभिट्थन।,

८म्‌ रमि खा्वात्रि बतिम्। नैटण्ट्ं कंक नौव कटम्‌, नौ खांकांभ नटन नांन शटम शतिधा 4-७त्र नटन ङ्मि छारिग्राष्ट (गथाग्र शा खिषर) त्त्र रेख्ललन, ८जांभाटव्र षतिटड (वंक मक्षा टकम। कांठरे कान

मि बुर छद 8 (यथीटनटङ एरनिटर्ट कवन, ८मराटन द्मिग्र। कर कि छाविद्न करि खमि मात्रो चैन। यामि वूकि छवि (मै कटव मि शृत्रिम्रं खांमातर कत्‌ वन्दन, ५4 छानर्वामां (मंत्रा बाशिव नम छत्र कोटर्भत्र नाज (मावर ङोठथानि दौर्विश्रों (खगवर “दे वक्रन खपेढे बरिटिद” वटगिन नितानांटञ

खाटतर। वटनष्टिम, “रे कामेश] यप्मि-व शि छिद्र। सां मटनव्र शन बटनषे व्ररिन एणटर (कव नो जोर |”

खमि दटनष्टिश््‌--“८मानांत्र वक्‌, दु छड्र कट्वर (यात्र यनटस्व्र तराणि चूम छषटड इट्य याग्र८व (शो (डतर निग्रव्र वथमौने ष्दनिटज्े भाटक, व्रकनौ ८य ङद्र वामि प्थटतटमे (व मिं दांमटवत त्राटरड वादकं विकाटश्त्‌ वीनैी.।“

(छांमोप्तर इषद्ध, ऋणं

मि वटनष्टिटिल, “यज्ि-व] कषेटन। व्रलनौः (नींरटड एश

< एषि कामन वात्र वैन सिबराट्य्र खांनिव.जाञ्र 1 यामि कटगर्टग्र, “नोन (। मनौ, कटम्‌ (मात्र जक दिग, ` छड् कट्वर यमि (जांमाटद यांज्र (कर्‌ यांब्र निग्रा।

भैटमं भटर (गोवर खनेत्राव, इ्म्र नटनन्र ङटन

समि (कानर्िन कूलछङ्रटड (कांटा वाथ पिह जट्न,

थेन्‌ कि टमि (भाटत्र (दृट्‌ याट्द (गांन अनो मटनावम।, (मभिटनव्र (महे खनेद्रांथं ₹"टड कत्निटव यांप क्रमा

मि सन्नतर, जनेड कषद शृकोमन्नित्र नारि"

महश्च टश्च छोकिटर्टष (छाम) शुखोत्रौत्रा भिवांन्राखि

(मात डे (नदर्‌ क्रूटलव्र शख), वांजोटम छो मिग्र। शाय, -

यि (कृटनौमिन खोब्न (काटन)। नान गांटश् घम छद शोंग्र,

(गोद (गेटङ्व नोनांन शिखिं यमि जांत्रि नैं (वटश्र

खातर (काटना कोद्र शरान (छदम खाटम कांटा नगर (नटय षन कि मि (बाटव्र (ष्टु यादव रमि वदनष्िटन शश. खनौक डगर (करेन नीयिग्रा ठकोटग्र। ना खानेनांग्र

(डान चटब्रत्र बड काक यामि वुटकतर अीषएन एत

मनि कति वीस वररिव मंसांममजांय चिव |

व्र काट शौन शैमिटव नां (ङण), खषू एमि यात्र वामि, छावर मांटथं मोटय तरिट्व माक] पौरं फिविम यामौ

मि छोविगर्ट (मपिटनव (मरे कग उटनेद्र मा?

<दे-मव कथ वटक निया खांखि€ कद्वट नी !

८मिटनब्र (महे ङक्टन नमोटतत मा॑क्ा मोनिग्रां रस,

पयमनि (य मव शटनरिद्र कथ दभिव्रा (जमात ठम --यालिकाद्र नगौ (म. नौ नां, यमि दब्नवां (भेव.

छत्‌ थत्र वूटक (नथ (नद मिं ८म मट्दन्न (काटन) (नमं

-दौलूत्र - ७७ (मिनि. धमनि एटनशिनि जयि गैटकव्र नोन मात्रो.

--छद 4 खा कांग (म्‌ यांकागं नग्न, न्न वूटकं (मष्टा

(ममिन मनि विट्छान दांजंम,--योकिकांब्र नम्र

--4 (वन कि वा| गरट्ड नां (भेटत कपिष्ट ङ्दनमथ

«दे वानूषएद्र.-- कि (मिमत शश्र शाग्र गदि शायर,

कि दार्थटत्र 4 (व शट कटनत्र जां छेङिट् रेडन वांम्न

«व्रा (के जत्र माका र्ट्द ना--नांडे छाटत्र। थटश्रांखम

एभि वमि (मारब ङन्‌ (शरेटन मरि, (मांब्र (छाना कुशन

(डामर शद्विश्रो कारिट्ङि जामि, (द्य (नीक) नाजिग्रा् ,. उट 4ङ जल, यंाग्र नाडि शा काटत्र काट !

कूटम्‌ (णाक नोट, वटक (नीका नाट नाट छांन्वाम्‌। माद, 44 टव मन विश्रम किव्‌। (ट्य यपि (शौक ब्राटख

(जांराटवर खकिटक टन (णि खांमि, वटक्र नयैन्र शानिः जदिष्डरि ह्र (देखा यमन नाकि वाथाछत्रा मनयानि !

मांह (मटर वामि वानु गांचिट्डङ्ि, वानूव्र कट्रंत्र घाम,

(मयि वमि टे जौदन रशे कावर अङि (मांष्ट। यात्र

ज्राडत्र कानिटव् ब्रूमि भूरि श्ट मात्रा ग्व वटम्‌ मोचि,

अटन. रमर नि कृटङ्नो माधराम्र (वणनाटव्र चिट्द त्रिं

मि छाविग्राष्ट (जामाघ्त्र विग्र ब्राट्ड चु नादे (मात्र, निग्रह थ्रौन व्वनिदड्टे शाटक यामव र्भ्र ना (द्र | भिषा जमद--कनांवन शति ब्राद्जव्र वायम कटक,

जीका उाटव्र शविवाघ्व एव्र (काष्टनांव्र भ्र कटं

(रमापत ददनं ¡मौय

ज्ाटत्र विव्रहौ दिं रित्र ाखौग्र ८द-घूम वुटकद कथ, . . छात्रि मोटवे ८यन छक कटमं--4 भूक गात्र वाथा !